यह कहानी है मेरे दोस्त राज के साथ घटित हुए एक किस्से की। एक रात राज और उसके पिताजी अपनी कार मे बैठ कर बाहरगांव से अपने शहर की तरफ जा रहे थे। राज के पिताजी ने काफी पी राखी थी, और वे नींद मे भी थे। इस लिए कार राज ही चला रहा था। राज तब वैसे तो सिर्फ सोलह साल का था, लेकिन उसका गाड़ी चलाने का शौक काफी पुराना था। इसी लिए उसके पिताजी ने उसे ड्राइविंग सिखा रखी थी।
काफी
समय तक राज ड्राइविंग कर रहा था। पिताजी की आँख लग गयी थी और वे गहरी नींद मे थे।
थोड़ी देर चलते चलते वे दोनों एक जंगली इलाके मे दाखिल हुए, जहा मुश्किल से कोई रोशनी दिखाई पड़ रही थी।
उस समय रास्ते को रोशन करने का सिर्फ एक ही जरिया था, और वो
था राज की कार के हेड लाइट्स। थोड़ी देर के बाद अचानक गाड़ी रुक-रुक कर चलने लगी, और अगले ही पल बंद पड़ गयी। राज ये देख कर चौक गया,
उसने डैशबोर्ड की तरफ देखा तो उसे पता चला की हीटिंग वाली लाल लाइट जल रही है।
गाड़ी ओवर हीटिंग के कारण बंद पड़ी थी। गाड़ी के बंद पड़ते ही उस सुमसाम जगह पर एकाएक
अंधेरा छा गया। राज समझ गया की अब उसे उस जगह पर एंजिन ठंडा होने तक रुकना पड़ेगा।
उसने पिताजी की ओर देखा, वे तो गहरी नींद मे थे, और खर्राटे मार रहे थे।
कुछ
देर तक गाड़ी मे बैठ कर राज बोर हो गया। उसने सोचा की थोड़ा गाड़ी से बाहर निकल कर
टहल लिया जाये। पहले तो वो अंधेरे के कारण झिझक रहा था, लेकिन अब थोड़ी सी चाँद की रोशनी नजर आ रही
थी, इसी लिए राज ने बाहर निकालने का फैसला किया। उसने पिताजी
के पॉकेट मे से एक सिगरेट और माचिस निकाली और दरवाजा खोल कर बाहर निकल आया। राज ने
कार का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, ताकि अगर पिताजी जाग जाए तो
उसे उनकी आवाज आए और वह सिगरेट तुरंत फैक दे। राज कार की पीछे की तरफ आ कर खड़ा हो
गया और उसने सिगरेट सुलगा दी।
जैसे
ही राज ने सिगरेट सुलगाई, उसे अपने सामने
की तरफ थोड़ी ही दूर कोई खड़ा हुआ दिखाई दिया। चाँद के धीमी रोशनी मे यह देख पाना
मुश्किल था की वह कौन है, लेकिन उसके पहनावे को देख कर राज
को यह तो समझ मे आ ही गया की वह एक औरत थी। उसने भूरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी, इसके अलावा राज और कुछ नहीं देख पा रहा था। उसे देख कर राज थोड़ा सहम गया, लेकिन उसे लगा की शायद वह उसका वहम था। इस लिए सिगरेट का एक कश लेकर उसने
धुवा छोड़ा। अभी उसने धुवा छोड़ा ही था, की उसने देखा वह औरत
उसके एकदम करीब आ कर खड़ी हो गयी थी। उसका चेहरा बहुत ही भयानक लग रहा था। उसे देख
कर राज बहुत ही ज्यादा डर गया। डर के मारे वह हिल भी नहीं पा रहा था। उसे लगा की
शायद अब वह नहीं बचेगा।
कुछ
पलों तक ऐसे ही खड़े रहने के बाद उस औरत ने इशारा कर के राज से उसकी सिगरेट माँगी।
राज तो पहले से ही सदमे मे था, और वह
अपनी सिगरेट उस औरत को देने ही वाला था, की अचानक उसे कुछ
याद आया और उसने अपनी सिगरेट न तो उस औरत को दी, और न ही उसे
जमीन पर फैकी। राज ने उस सिगरेट को अपनी ही बाजू पर रगड़ कर बुझा दिया। उसके ऐसा
करने के पीछे भी एक वजह थी, जो बाद मे राज ने मुझे बताई थी।
राज ने जैसे ही वह सिगरेट बुझा दी, वह औरत उसके तरफ देख कर
मुस्कराई और देखते ही देखते गायब हो गयी। यह सब देख कर राज दंग रह गया था, लेकिन उसने तुरंत ही अपने आप को संभाला और दौड़ते हुए कार मे बैठ गया और
झट से दरवाजा बंद कर लिया।
राज
ने पिताजी को देखा, वे तो अभी भी
गहरी नींद मे थे। फिर राज ने मूड कर कार की बाहर की ओर देखा,
तो वह औरत कार के बाहर, उसकी विंडो के पास ही खड़ी थी। वह उसे
देख कर एक शैतानी मुस्कान दे रही थी। यह देख कर राज और भी डर गया और कार को दुबारा
स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा। वह उस औरत को देखता और कार का सेल मारता। कुछ
छह-सात बार कोशिश करने के बाद आखिर मे कार स्टार्ट हो ही गयी। जैसे ही कार स्टार्ट
हुई, राज ने देखा की वह औरत फिर से गायब हो गयी थी। यह देख
कर राज की जान मे जान आई और वह गाड़ी को दौड़ाते हुए सीधा घर आकर ही रुका। उसने अपने
पिताजी को भी यह बात अगली सुबह ही बताई। उसके पिताजी यह सुन कर राज पर काफी गुस्सा
हुए। उन्होने कहा, “बेवकूफ, ऐसी जगहो
पर तो पेशाब करने से पहले भी सौ बार सोचना पड़ता है, और तूने
सिगरेट जला डाली!” राज के इतने गैरजिम्मेदार होने की वजह से,
वे उससे नाराज तो थे, लेकिन उसके सही सलामत बच जाने से उतने
ही खुश भी थे।

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