मनोज एक कॉलेज मे पढ़ने वाला होनहार लड़का था। वह पढ़ाई मे काफी होशियार था, लेकिन उसकी आर्थिक परिस्थिति कुछ खास नहीं थी। उसके पिताजी तब ही गुजर गए थे जब वह सिर्फ छह साल का था। माँ छोटे मोटे काम करके घर चला रही थी। जैसे तैसे माँ ने मनोज को कॉलेज तक पहुंचा दिया था।
कॉलेज
मे मनोज के काफी मित्र थे। लगभग सभी मित्र अच्छे परिवार से थे और उनकी आर्थिक
परिस्थिति मनोज से काफि अच्छी भी थी। उन सभी के पास स्मार्टफोन्स थे, पर मनोज के पास किसी भी तरह का कोई फोन
नहीं था। जैसे वे लोग आपस मे सोशल मीडिया की मदद से जुड़े हुए थे, उस प्रकार मनोज उनसे जुड़ा हुआ नहीं था। इसी लिए वह अपने आप को उनके साथ
होते हुए भी अकेला महसूस करता था। वह हमेशा सोचता की काश मेरे पास भी अगर
स्मार्टफोन होता, तो मैं भी हमेशा अपने दोस्तो के संपर्क मे
रहता। लेकिन पैसो की तंगी की वजह से मनोज फोन खरीदने मे असमर्थ था।
एक
दिन मनोज जब अपने कॉलेज जा रहा था, तो उसे रास्ते मे एक स्मार्टफोन पड़ा हुआ नजर आया। उसे देख कर मनोज काफी
खुश हुआ, पर साथ ही मे उसनी सोचा की यह फोन यहा ऐसे ही कैसे
पड़ा होगा, जरूर किसि ने इसे गलती से गिरा दिया होगा। मनोज ने
आस-पास नजर घुमई लेकिन वहा पर कोई भी नहीं था। उसने काफी इंतजार किया लेकिन कोई भी
वहा पर उस फोन को लेने के लिए नहीं आया। आखिर मनोज ने तय किया की अब यह फोन वह खुद
ही रखेगा।
फोन
दिखने मे काफी अच्छा था, और जब मनोज
ने उसे खोला तो वह चालू भी था। समस्या यह थी की फोन को किसी तरह के पासवर्ड से सुरक्षित
किया गया था। मनोज वह पासवर्ड नहीं खोल पाया। कॉलेज जा कर उसने वह फोन अपने दोस्तो
को दिखाया उसके दोस्तो को वह फोन काफी पसंद आया। मनोज के दोस्तों ने उसे सुझाव
दिया की वह इस फोन को एक गॅलरी मे जा कर दिखाये और उस का पासवर्ड खोल ले। उस ही
दिन कॉलेज के बाद मनोज सीधा मोबाइल गॅलरी मे गया। कुछ समय बाद उसका पसस्वर्ड खोल
दिया गया और मनोज फोन लेकर घर चला आया।
रात
को खाना वगैरा सब कुछ निपटने के बाद मनोज अपने कमरे मे आया और अपना फोन खोला। मनोज
ने देखा की उस फोन मे इंटरनल ऐप्स के अलावा और कोई भी दूसरा ऐप नहीं था। फिर उसने
फोन की गॅलरी को खोला, तो वह भी
खाली थी; सिवाय एक फोटो के। मनोज ने उस पर टैप कर के उसे
खोला और उस फोटो को देख कर वह दंग रह गया। वह फोटो एक क्लोज़ उप शॉट था जिसमे एक
लड़की लेटी हुई थी, उसका चेहरा कैमरे की ओर था, उसकी आंखे बंद थी, उसका चेहरा मार-पिटाई के निशानो
से भरा था। देखने वह एक मृत शरीर के समान लग रही थी। मनोज उस फोटो को देख कर बहुत
डर गया। उसके हाथों से फोन छुट गया और जमीन पर गिर गया। गनीमत थी की फोन टूटा नहीं, मनोज ने उसे उठाया और जैसे तैसे उसे स्विच ऑफ कर दिया। मनोज ने फोन को
अपने बैग मे रख दिया और सोने चला गया।
दूसरे
दिन मनोज ने वह बात अपने दोस्तो को बताई। दोस्तों ने जब वह फोन चेक किया तो उन्हे
उसके गॅलरी मे ऐसी कोई भी फोटो दिखाई नहीं दी। मनोज ने भी देखा तो उसमे ऐसी कोई भी
फोटो नहीं थी। दोस्तो ने कहा की शायद मनोज को कोई वहम हुआ होगा। मनोज ने भी सोचा
की शायद दोस्त ठीक ही कह रहे है। उसके बाद उसने उस ही फोन से बहुत सारी फोटोस ली, कुछ सोशल मीडिया के ऐप्स भी डाले।
कॉलेज
के बाद मनोज अपने घर की ओर निकला था। चलते चलते वह उस जगह पर आ पहुंचा जहा उसे वह
फोन मिला था। जैसे ही मनोज वह पहुंचा, उसका फोन बजने लगा। उसने देखा तो उस फोन पर किसी अंजान नंबर से कॉल आया
था। मनोज हैरान हो गया की उसने अभी तक फोन मे सिमकार्ड भी नहीं डाला था, तो कॉल कैसे आ गया। उसने सोचा की कॉल को डिसकनेक्ट कर दिया जाये, पर दूसरे ही पल उसने सोचा की कॉल उठा कर देख ही लेते है आखिर क्या माजरा
है। उसने जैसे ही कॉल उठाया उसे किसी लड़की के चिल्लाने की और मार पिटाई की आवाज
सुनाई दी। वह लड़की बार बार चिल्लाते हुए मदद मांग रही थी,
जैसे उसे कोई पीट रहा हो और उसकी जान खतरे मे हो। यह सुन कर मनोज की हालत पतली हो
गयी, उसे समझ मे नहीं आ रहा था की क्या किया जाये। उसने कॉल
बंद कर दिया और फोन अपने बैग मे डाल कर सीधा घर चला आया।
शाम का
समय था, मनोज अभी भी उस कॉल को लेकर परेशान था। एक
तो बिना किसी सिमकार्ड के कॉल आना, ऊपर से ऐसा भयानक कॉल
सुनना; यह काफी था उसे बहुत ज्यादा डराने के लिए। मनोज की उस
फोन को छूने की हिम्मत नहीं हो रही थी। फिर भी उसने थोड़ी बहुत हिम्मत जूटा कर वह
फोन लिया और उसे चेक किया। उसने देखा की उस फोन मे जो ऐप्स उसने आज ही डाले थे, उसमे से एक भी ऐप वहा पर मौजूद नहीं था। यह देख कर मनोज चौक गया। फिर
उसने तुरंत ही गॅलरी खोली, और वह देख कर दंग रह गया की गॅलरी
फिर से खाली थी, सिवाय एक फोटो के। मनोज जानता था कि उस फोटो
मे क्या है, इस लिए वह उसे खोल कर देखने मे झिझक रहा था। फिर
भी उसने वह खोला और उसे देखने के बाद डर से कांपने लगा। वह फोटो उस ही लड़की की थी, बिलकुल उस ही हालत मे। पर इस बार उसकी आंखे खुली हुई थी और चेहरे पर
गुस्से के हावभाव थे।
उस
फोटो को देख कर मनोज बहुत ज्यादा डर गया, डर के मारे उसके हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए। उसके हाथों से वह फोन फिर नीचे गिर
गया। फोन के नीचे गिरते ही वह बजने लगा। मनोज ने देखा की फिर से किसी अंजान नंबर
से कॉल आया था। मनोज उस कॉल को उठाना नहीं चाहता था, लेकिन
फिर भी कुछ हिम्मत कर के उसने उस कॉल को उठाया। जैसे ही उसने कॉल उठाया, उसने पाया की दूसरी तरफ खामोशी थी। दूसरी तरफ से सिर्फ गहरी साँसो की
आवाज सुनाई दे रही थी। कुछ पल रुकने बाद अचानक से एक लड़की गुस्से मे चिल्ला कए बात
करने लगी। मनोज ने सुना,
“तुम
ने मेरी मदद नहीं की… अब मैं
तुम्हें नहीं छोडुंगी...”

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