पूल वाला खबीस

Pool Wala Khabis

राहुल अपने गाँव का एक नामचीन पहलवान था। वह अंगकाठी मे भी दूसरे पहलवानो से ज्यादा तगड़ा था। इसी लिए उसे कुश्ती के लिए चुनौती देने का किसी पहलवान मे साहस नहीं होता था। लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद भी राहुल को जरा भी घमंड नहीं था। वह मन का बहुत ही उदार था और दूसरों की सेवा करने मे हमेशा तत्पर रहता था।

एक बार राहुल अपने मामा जी के गाँव गया। बचपन के बाद राहुल काफी सालों से अपने मामा जी के गाँव नहीं गया था। उसके मामा गोविंद जी एक किसान थे, और राहुल उनका एक लौता भांजा था। इसी लिए उसकी खातिरदारी मे उन्होने कोई भी कसर नहीं छोड़ी। राहुल ने उस गाँव मे भी दोस्त बना लिए। इसी लिए राहुल को कभी लगा ही नहीं की वह घर से दूर आया है। कुल मिलाकर राहुल को मामा जी का गाँव भा गया था।

एक बार राहुल के दोस्तों ने एक दावत का आयोजन किया। दावत एक दोस्त के खेत मे थी, जो गाँव से बाहर थोड़ी ही दूरी पर था। मामा जी ने राहुल से कहा की रात होने से पहले घर लौट आए। दावत रात मे थी इस लिए वे सब दोस्त शाम को ही घर से निकल गए। उन लोगो मे से किसी के पास गाड़ी नहीं थी, इसी लिए वे लोग पैदल ही खेत की ओर चल पड़े। गाव के बाहर ही एक छोटी, सुखी हुई नदी थी; जिसके ऊपर एक सीमेंट का पूल बना हुआ था। वह एक लौता माध्यम था उस नदी को पार करने का। नदी पार करने के बाद थोड़ी ही देर मे राहुल सभी दोस्तो के साथ दावत वाली जगह पर पहुँच गया।

सभी दोस्तो ने दावत का भरपूर आनंद उठाया। सब ने मिल कर हंसी-ठहाके लगाए, खूब सारी मस्ती भी की। उन लोगो ने थोड़ी-बहुत शराब भी पी। कुछ समय बाद राहुल को एहसास हुआ की अंधेरा हो चुका है। मामा जी ने उसे रात होने से पहले घर लौटने को कहा था, इसी लिए उसने सभी दोस्तों से विदा ली और अकेला ही घर की ओर चल पड़ा। कुछ दूर आने पर उसे वही पूल नजर आया जो उसने जाते समय देखा था। पूल पर कुछ लाइटे धीमी रोशनी दे रही थी। जैसे ही राहुल उस पूल पर पाहुचा, उसने उस धीमी रौशनी मे देखा की पूल के एक किनारे पर एक वयस्क आदमी खड़ा था। वह आदमी थोड़ा बूढ़ा सा नजर आ रहा था, लेकिन उसका शरीर विशाल था; जैसे किसी पहलवान का होता है।

वह आदमी अपने हाथ मे तंबाखू मल रहा था। उसने राहुल की ओर देखा और थोड़ा सा मुस्कुराया। राहुल ने भी उसका जवाब मुस्कान से ही दिया। वह आदमी बोला,

“तुम गोविंद के भांजे हों न?”

राहुल ने कहा, “जी हा... पर आप कौन है श्रीमान? मैंने आप को पहचाना नहीं।”

“इससे क्या फरक पड़ता है...” उस आदमी ने कहा, “मैं तो तुम्हें जानता हूँ न, इतना ही काफी है।”

फिर उस आदमी ने अपनी तंबाखू मुंह मे डाल ली और राहुल से कहने लगा, “तुम तो बहुत तगड़े नजर आते हो, कुश्ती-वुश्ती का शौक है?”

राहुल ने कहा, “जी बिलकुल... अपने गाँव मे मैं कुश्ती के लिए बहुत मशहूर हूँ। जब से मैंने महारत हासिल की है, तब से लेके आज तक मुझे कुश्ती मे कोई हरा नहीं पाया।”

इस पर हसते हुए उस आदमी ने राहुल से कहा, “बेशक... तुम मे वह प्रतिभा नजर आती ही है। क्या तुम मेरे साथ एक दांव लगाना चाहोगे?”

यह सुन कर राहुल अचंभे मे पड़ गया। भले वह आदमी डीलडौल से तगड़ा था, लेकिन था तो बूढ़ा ही। एक वृद्ध व्यक्ति से एक युवक की प्रतिस्पर्धा राहुल को जायज नजर नहीं आ रही थी। और वैसे वह कुश्ती के लिए न तो सही समय था और न ही सही स्थान। इस लिए राहुल ने उस आदमी को माना कर दिया। इस पर उस आदमी ने चिढ़ाते हुए राहुल से कहा,

“क्यू भाई... एक बूढ़े आदमी से डर गए। दिखने मे तो बहुत जानदार नजर आते हो, पर एक बूढ़े आदमी से लड़ने से पहले ही हार मान ली।”

राहुल को उस आदमी के यह तीखे शब्द पसंद नहीं आए। उसने उस आदमी की चुनौती स्वीकार करने का निर्णय लिया। राहुल ने कहा,

“ठीक है चाचा जी, अगर आपकी इतनी ही इच्छा है तो हो जाये एक दांव। पर जरा संभाल कर, काही आपके शरीर को दुर्भाग्य से कोई क्षति पहुँच गयी तो मैं जिम्मेदार नहीं रहूँगा।”

इस पर उस आदमी ने कहा, “मंजूर है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है।”

“कैसी शर्त?” राहुल ने पूछा।

वह आदमी बोला, “अगर तुम जीत गए तो तुम घर जा सकते हो। पर अगर मैं जीत गया, तो तुम्हें मेरे साथ चलना होगा… हमेशा के लिए।”

उस आदमी के यह बोल सुन कर राहुल को थोड़ी गड़बड़ नजर आई। उसे लगा की वह आदमी उसे बेवजह डराने की कोशिश कर रहा है। राहुल ने कहा, “मंजूर है!”

दोनों ने अपनी-अपनी कमीजें उतरी और कुश्ती के लिए तैयार हो गए। फिर क्या था, पूल के ऊपर ही दोनों ने अखाड़ा बना दिया और एक दूसरे से भीड़ गए। राहुल तो मंजा हुआ पहलवान था ही, लेकिन वह आदमी भी कुछ कम नहीं था। दोनों एक दूसरे को पटकने की जी तोड़ कोशीशे करते रहे, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पा रहा था। कई घंटे बीत गए, लेकिन निर्णय किसी के भी पक्ष मे नहीं आ रहा था। राहुल अब तक काफी थक चुका था, वह हैरान था की एक बूढ़े आदमी को पछाड़ने के लिए उसे इतनी देर क्यू लग रही है। कुछ समय बाद सूर्योदय का समय हुआ, और सूरज की पहली किरण नजर आई। यह देख कर उस बूढ़े आदमी ने अपने आप को राहुल की पकड़ से छुड़ाया और बोला,

“हा... ठीक है, आज तुम जीते। कल फिर से मुक़ाबला करेंगे, फिर देखते है कौन जीतता है।”

ऐसा कह कर वह आदमी पूल के किनारे जा कर खड़ा हो गया, और राहुल के कुछ कहने से पहले ही नीचे कूद गया। यह देख कर राहुल उस दिशा मे दौड़ा जहा से उस आदमी ने नीचे छलांग लगाई। राहुल ने नीचे देखा तो उसे कोई भी नजर नहीं आया। यह बात राहुल को अजीब जरूर लगी, लेकिन उसने उस पर ध्यान नहीं दिया। वह अपनी जीत से खुश था और उस ही खुशी मे वह घर आ पहुंचा।

पहुँचने पर उसकी मुलाक़ात मामा जी से हुई जो कल रात से राहुले के आने का इंतेजार कर रहे थे। राहुल से पुछने पर राहुल ने पूल वाला पूरा किस्सा बताया। यह सुन कर मामा जी के चेहरे का रंग उड़ गया। जब रहूल उनसे पूछा की क्या हुआ, तो उन्होने राहुल को बताना शुरू किया। उन्होने कहा,

“उस पूल पर रात के समय एक खबीस लोगो को शिकार बनाता है। पहले तो वह अपने शिकार को कुश्ती के लिए चुनौती देता है। अगर शिकार चुनौती नामंज़ूर कर दे तो उसे वही पर मार डालता है, और अगर मंजूर कर ले तो कुश्ती मे हारा कर मार देता है। क्यूकी वह एक शैतानी ताकत होने के कारण उस से कोई भी जीत नहीं पाता।“

मामा जी ने आगे कहा, “इसी लिए मैंने तुम्हें रात होने से पहले घर लौटने को कहा था। उसका कारण तुम्हारा यह तगड़ा शरीर था। क्यूकी सुना है की वह खबीस उन ही लोगो मे सबसे ज्यादा दिलचस्पी लेता है जो पहलवान हो, या फिर शरीर से तगड़े हो।”

यह सब सुन कर राहुल के हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए। वह अपनी जगह पर ही बैठ गया। मामा जी ने उसे देखा तो उसे बुखार चढ़ गया था। वह दो दिनों तक बिस्तर मे ही पड़ा रहा। राहुल जैसे पहलवान की ऐसी हालत होना सभी को अचंभित कर रहा था। फिर कभी भी राहुल उस पूल के नजदीक नहीं गया, चाहे वह दिन मे हो या रात मे।

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